View Hymn (Bhajan)
Hymn No. 1978 | Date: 03-Feb-19971997-02-031997-02-03हकिकत कहता हूँ मैं तुझसे प्रभु कोई खुशामत करता नहीSant Sri Apla Mahttps://mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=hakikata-kahata-hum-maim-tujase-prabhu-koi-khushamata-karata-nahiहकिकत कहता हूँ मैं तुझसे प्रभु कोई खुशामत करता नही,
कि है तुमने मेरी हर कमी पूरी जीवन में, मुझे अब कोई कमी नही।
पाया है वह सबकुछ, जिसे शायद मैं कभी पा सकता नही,
यही है हकिकत, फिर भी लगे तुझे तेरी खुशामद प्रभु, तो मैं कुछ कर सकता नहीं।
जानता है जहाँ तू सबकुछ, तुझसे मेरी कोई बात छूपी हुई नही,
तो फिर ये हकिकतें क्या है, इस में खुशामतवाली कोई बात नही।
हो जाए जिसपर तू मेहरबान, वह फिर दुःखी रहता नही,
करना चाहे जिसे तू मालामाल, उसे कंगाल कोई कर सकता नही।
ये सच्चाई है ऐसी जिसे कोई झूठला सकता नही,
हो जाए जिसपर तेरी रहमत, फिर उसके पास कोई कमी रहती नही।
हकिकत कहता हूँ मैं तुझसे प्रभु कोई खुशामत करता नही