View Hymn (Bhajan)
Hymn No. 2472 | Date: 12-Jun-19981998-06-121998-06-12जैसे तू समझ रहा है अपनी सुख-साहेबीSant Sri Apla Mahttps://mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=jaise-tu-samaja-raha-hai-apani-sukhasahebiजैसे तू समझ रहा है अपनी सुख-साहेबी,
कभी पूछना अपनेआप से, के ये तेरी कमजोरी तो नही है।
भुगत रहा है आज जो तू सुख, इसमें कुछ भी बुरा नही है,
पर कल ना मिले अगर तुझे ये साहेबी, फिर देख हालत तेरी क्या होती है।
पता चल जाएगा तुझे तब, के तू धोखे में तो नही है।
ईश्वर का दिया सबकुछ भुगत रहा है तू, इसमें कुछ बुरा तो नही है,
पर कहने लग जाए तू मुझे, इसके बिना नही चलेगा, उसके बिना नही चलेगा तो,
कुछ भी करना, कैसे भी जीना पर रखना इतना याद, कमजोरी को कभी अपनाना नही है,
क्योंकि रहना है जीवन में सदा हँसते मुस्कुराते, जिंदगीभर हमें रोना नही है।
अपनी आदतों को अपनेआप से बाहर जाने देना नही है,
चलना है अकेले जहाँ हमें, वहाँ आदतों की बारात को दावत देनी नही है,
क्योंकि पूछना कभी खुद से, के कमजोरी आखिर किसे अच्छी लगी है।
जैसे तू समझ रहा है अपनी सुख-साहेबी