View Hymn (Bhajan)
Hymn No. 2028 | Date: 03-Mar-19971997-03-031997-03-03शिकवे-शिकायत, गिले, फरियाद जब भी तुम मिटा पाओगेSant Sri Apla Mahttps://mydivinelove.org/bhajan/default.aspx?title=shikaveshikayata-gile-phariyada-jaba-bhi-tuma-mita-paogeशिकवे-शिकायत, गिले, फरियाद जब भी तुम मिटा पाओगे,
तभी प्रभु को तुम जान पाओगे (2)
मिटाकर दिल से वैर-बैर, प्यार भरे भाव में खो जाओगे, तभी ...
यूँ तो रहता है वह हरदिल के करीब, पर करोगे प्यार तभी ये एहसास पाओगे।
जानना और पाना उसे आसान नही ये बात तुम खुद दोहराओगे।
पर इसी बात को दोहराने से, तुम कुछ और ना पाओगे।
अगर करोगे कोशिश दिलसे, तो कामियाबी जरूर पाओगे।
मिट जाएगा जब दिल से अभिमान, तभी पूर्ण रूपसे जान पाओगे।
अपने दिल में जब उसे जानने कि आस जगाओगे।
माया की ममता में से जब भी बाहर निकल पाओगे।
या तो फिर अपनेआप को सच्ची तरह पहचानोगे।
शिकवे-शिकायत, गिले, फरियाद जब भी तुम मिटा पाओगे